बांग्लादेषी शरणार्थियों का स्थानीय समुदाय से सामंजस्य की स्थिति का एक समाजशास्त्रीय अध्ययन
डाॅ. एल. एस. गजपाल1, राम नरेष टण्डन2
1एसोसिएट प्राध्यापक, समाजषास्त्र अध्ययनषाला, पं. रविषंकर शुक्ल विष्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)
2सहायक प्राध्यापक (समाजषस्त्र), शा. महाविद्यालय, नंदिनी अहिवारा
प्रस्तुत शोध अध्ययन भारत में बांग्लादेषी शरणार्थियों का एक समाजशास्त्रीय अध्ययन है, जो कि छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर तथा कांकेर जिले पर आधारित है। अध्ययन मुख्य रूप से इस बिन्दु पर केन्द्रित रहा है कि बांग्लादेष में हुए साम्प्रदायिक दंगे और 1971 में बांग्लादेष के विभाजन के समय जिन शरणार्थीयों को भारत सरकार के द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में शरणार्थी शिविरों में बसाया गया उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति किस प्रकार की है? ये शरणार्थी देश तथा राज्य की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, स्थानीय समुदाय व जनजाति संस्कृति की दृष्टि से किसी भी प्रकार से समस्यामूलक हो नहीं है? इन्हीं तथ्यों का परीक्षण शोध अध्ययन के माध्यम से किया गया है। शोध को व्यवस्थित रूप देने के लिए बांग्लादेषी शरणार्थियों की दो श्रेणी का अध्ययन किया गया है, जिसमें प्रथम श्रेणी के शरणार्थी जो आज भी शरणार्थी षिविर में रह रहे हैं। इसमें रायपुर जिले के माना केम्प के शरणार्थी शमिल हैं। जबकि दूसरे श्रेणी के शरणार्थियों में गैर श्वििरार्थी षरणार्थी जो कि कांकेर जिले के पखांजूर में निवासरत हैं उन्हें लिया गया है। अध्ययन हेतु माना केम्प से 40 तथा पखांजूर से 157 बांग्लादेषी शरणार्थियों का चुनाव उद्देष्य पूर्ण निर्देषन के द्वारा किया गया है। तथ्यों का संकलन साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से किया गया है, साथ ही अवलोकन प्रविधि का भी यथासंभव प्रयोग तथ्यों के संकलन में किया गया है।
बांग्लादेषी शरणार्थी, सामाजिक सामंजस्य, धार्मिक मान्यता , सांस्कृतिक मान्यता षिविरार्थी , गैर षिविराथी
प्रस्तावना
जब कभी भी बड़ी संख्या में लोगों का अन्तर्राष्ट्रीय पलायल, धार्मिक, जातिगत आधार पर होता है जिसे मानवता के आधार उन विस्थापित परिवारों अन्य देषों की सरकार द्वारा आश्रय दिया जाता है, जिससे स्थानीय समाज पर अत्यधिक दबाव होने व पारिस्थितिक संतुलन अव्यवस्था प्रारंभ होने लगती है। जिससे स्थानीय समुदाय व विस्थापित समूह के मध्य सामंजस्य बैठा पाना आसान नहीं होता है। इसके लिए निरंन्तर दोनों समूहों के बीच परस्पर संवाद व भाईचारे की भावना होना राष्ट्र व समाज की उन्नति व विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है। ;डंतेींससय1968द्ध1
प्रस्तुत अध्ययन में बांग्लादेषी शरणार्थियों (षिविरार्थी तथा गैर षिविरार्थि) की स्थानीय समुदाय से सामंजस्य की स्थिति का विश्लेषण किया गया है। इसका मुख्य उद्देष्य दोनों श्रेणी के शरणार्थियों की स्थिति का तुलनात्मक अध्ययन करना है। षिविरार्थियों (माना केम्प) की तुलना में गैर षिविरार्थी (पंखाजुर) के शरणार्थियों का स्थानीय समुदाय से सामंजस्य किस प्रकार का है। न केवल शरणार्थियों वरण जन सामान्य के लिए भी विभिन्न परिस्थितियों से सांमजस्य स्थापित कर पाना आवष्यक होता है जिसके अभाव में सामान्य गुजर बसर की कल्पना भी संभव नहीं होता है। यह बात शरणार्थियों के लिए और भी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि एकदम नये सामाजिक परिवेष से आकर सामान्य जीवन प्रारंभ कर पाना आसान नहीं होता है।;ळंददवद रू2001द्ध2
क्रियात्मक अवधारणा
बांग्लादेषी शरणार्थी - प्रस्तुत अध्ययन में बांग्लादेषी शरणार्थी से आषय ऐसे व्यक्तियों से हैं जो कि बांग्लादेष के साम्प्रदायिक दंगों एवं 1971 विभाजन के समय छत्तीसगढ़ राज्य के विभिन्न स्थानों पर शरणार्थी के रूप में बसाया गया है। इनका नाम शरणार्थियों की सूची में आज भी शामिल हैं। जबकि अधिकांष शरणार्थियों को सरकार द्वारा विस्थापित कर भारतीय नागरिकता प्रदान की जा चुकी है।
अध्ययन का उद्देष्य -
1 उत्तरदाताओं के सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि को ज्ञात करना।
2 उत्तरदाताओं की धार्मिक, सांस्कृतिक मान्यताओं का अध्ययन करना।
उपकल्पना
(1) शरणार्थियों की तुलना में गैर षिविरार्थी बांग्लादेषी शरणार्थियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।
अध्ययन पद्धति: -
प्रस्तावित अध्ययन पद्धति को तीन भागों विभक्त किया गया है जिसके अन्तर्गत-
(अ) अध्ययन क्षेत्र
(ब) उत्तरदाताओं का चुनाव
(स) तथ्य संकलन की प्रविधि एवं उपकरण
अ. अध्ययन क्षेत्र
अध्ययन हेतु अध्ययन क्षेत्र के रूप में रायपुर जिले के माना कैम्प तथा कांकरे जिले के पखांजुर नगर पंचायत में बसाये गये बांग्लादेशी शरणार्थियों का अध्ययन किया गया है।
ब. उत्तरदाताओं का चुनाव
क्र. शरणार्थियांे का स्थान कुल परिवारों की संख्या अध्ययन हेतु चयनित परिवार
1 माना कैम्प (जिला रायपुर) 262 40(15.3ः)
2 पखंाजूर नगर पंचायत (जिला कंाकेर) 2310 157(6.8ः)
योग 2572 197(7.6ः)
इस प्रकार अध्ययन हेतु कुल परिवारांे 2572 मे से 7.6 प्रतिषत परिवार (197) का चुनाव दैवनिर्दषन प्रविधि के लाटरी प्रणाली से किया गया है।
स. तथ्य संकलन की प्रविधि व उपकरण -
अध्ययन हेतु प्राथमिक तथ्यों का संकलन संरचित साक्षात्कार-अनुसूची के माध्यम से किया गया है। तथ्यों के संकलन हेतु अवलोकन प्रविधि का भी प्रयोग किया गया है। द्वितीयक तथ्यों का संकलन दोनों जिलों में बांग्लादेषी शरणाथियों से संबंधित उपलब्ध शासकीय दस्तावेजों/प्रपत्रों से किया गया है।
सामुदायिक गतिविधियों में आमंत्रण -
किसी भी समाज के लोगों के लिए विभिन्न सामुदायिक गतिविधियों व कार्यक्रमो में शामिल होना लोगों के मध्य पारस्परिक सामुदायिक एकता की भावना को दृष्टिगोचर करता है। यह सामुदायिक विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। जो सरकार व स्थानीय समूह के सहयोग से संभव होता है। समुदाय का सर्वागीण विकास समुदाय की अंतर्निहित क्षमता, शक्ति एवं उपलब्ध साधनों द्वारा सामूहिक प्रयास से संभव होता है। जिससे कि प्रत्येक समूहों के मध्य आपसी सहयोग व एकता की भावना बनी रहे, जिससे समाज सुचारूरूप से निरंतर प्रगतिषील बना रहे। ;सिंह,वन्दना 2002द्ध3 निम्नांकित तालिका में उत्तरदाताओं की सहभागिता को दर्षाया गया है-
सामुदायिक गतिविधियों में आमंत्रणके विवरण से स्पष्ट हुआ है कि सर्वाधिक 54.3 प्रतिषत उत्तरदाताओं का मानना है कि उनको आयोजक प्रमुख द्वारा सामुदायिक गतिविधियों में आमंत्रित किया जाता है। 41.7 प्रतिषत उत्तरदाताओं का मानना है कि इस प्रकार को गतिविधियों में वार्ड के निवासियों द्वारा आमंत्रित किया जाता है। जबकि 4.0 प्रतिषत का मानना है कि वार्ड पार्षद द्वारा सामुदायिक गतिविधियों में आमंत्रित किया जाता है।
प्राप्त तथ्यों का क्षेत्रवार विष्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि पखांजुर के सर्वाधिक 61.8 प्रतिषत आयोजक प्रमुख द्वारा एवं 38.2 प्रतिषत उत्तरदाताओं का कहना है कि वार्ड के निवासीओं द्वारा सामुदायिक गतिविधियों मंें आमंत्रित किया जाता हैं। माना के 55.0 प्रतिषत वार्ड के निवासियों द्वारा, 25.0 प्रतिषत आयोजक प्रमुख द्वारा आमंत्रित किया जाता है तथा सबसे कम 20.0 प्रतिषत वार्ड के पार्षद द्वारा आमंत्रित किया जाता है। निष्कर्षतः यह माना जा सकता है कि बहुसंख्यक उत्तरदाताओं को वार्ड के लोगों तथा कार्यक्रम का आयोजन करने वाले लोगों के द्वारा आमंत्रण दिया जाता है।
स्थानीय सामुदायिक कार्यक्रमों/आयोजनों में सहभागिता-
समुदाय से अभिप्राय ऐसे सामाजिक जीवन से है जिसमें ऐसे अनेक मनुष्य सम्मिलित होते है जो सामाजिक संबंधों के परिस्थितियों के अंतर्गत साथ-साथ रहते है, जो परिवर्तनषील होने पर भी समान बनी रहने वाली रूढ़ियों और प्रचलनों द्वारा परस्पर संबंधित होते है। तथा जीवन की सभी बुनियादी शर्ताे की पूर्ति में पारस्परिक सहयोग करते है।;डंबसअमतंदक च्ंहमरू1968द्ध4
इस विषय पर तथ्य संकलन को निम्न तालिका में दर्षाया गया है-
स्थानीय सामुदायिक कार्यक्रमों/आयोजनों में सहभागिता से संबंधित उपरोक्त विष्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि सर्वाधिक 72.6 प्रतिषत उत्तरदाता पूर्णतः सहभागिता होना बतलाया है जबकि 27.4 प्रतिषत उत्तरदाता आंषिक सहभागिता होना बतलाया है।
प्राप्त तथ्यों का क्षेत्रवार विवरण से पता चलता है कि पखांजुर के 65.6 प्रतिषत पूर्णतः सहभागिता होना बतलाया है एवं 34.4 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने आंषिक सहभागिता होना बतलाया है। माना के शतप्रतिषत उत्तरदाताओं ने पूर्णतः सहभागी होना बतलाया है।
सामुदायिक कार्यक्रमों के विषय में सलाह लिया जाना -
व्यक्तियों का एक ऐसा समूह, जिसके अंतर्गत लोग एक-दूसरे से जुडे़ हुए नहीं होते है, पर वे एक-साथ रहते है और एक-दूसरें के साथ सहयोगात्मक भावना रखते है। यह परम्परागत परिवार का एक विकल्प है। ;ैींीरू1999द्ध5
स्थानीय सामुदायिक कार्यक्रमों के विषय में सलाह संबंधित तथ्यों का निम्नलिखित तालिका में दर्षाया गया है-
सामुदायिक कार्यक्रमों के विषय में सलाह लिया जाना संबंधित विवरण से स्पष्ट हुआ है कि सर्वाधिक 97.9 प्रतिषत उत्तरदाताओं का मानना है कि सामुदायिक कार्यक्रमों के विषय में उनसे सलाह ली जाती है। जबकि 2.6 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने नकारात्मक जवाब दिया है।
प्राप्त तथ्यों का क्षेत्रवार विवरण से विदित होता है कि पखांजुर के 96.9 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने माना है कि उनसे सलाह लिया जाता है किन्तु 3.1 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने माना है कि उनसे किसी प्रकार का सलाह नहीं लिया जाता है।जबकि माना के शत् प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सलाह लिया जाना बतलाया है। ज्ञात तथ्यों के आधार पर यह माना जा सकता है कि अधिकतर बांग्लादेशी शरणार्थियों की सामाजिक स्थिति वर्तमान परिवेष में विष्वसनीय हो चुकी है यही वजह है कि समुदाय स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में उनसे सलाह लिया जाता है। यहाॅ पर ज्ञात तथ्यों का दूसरा पक्ष यह भी है कि जिन स्थानों पर उन्हे बसाया गया है वहाॅ ये संख्याबल में काफी अधिक है ऐसे में किसी भी सामाजिक आयोजनों में इनकी भागीदारी महत्वपूर्ण होती है।
सलाह को महत्व दिया जाना-
सामुदायिक कार्यक्रमों में सलाह को महत्व दिये जाने वाले तथ्यों के विषय में माना तथा पखांजुर के उत्तरदाताओं से प्राप्त विवरण को निम्नलिखित तालिका में दर्षाया गया -
सलाह को महत्व दिये जाने संबधित विवरण से यह स्पष्ट हुआ है कि 83.3 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सलाह को महत्व दिया जाना बतलाया है जबकि 16.7 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सलाह को महत्व नही दिया जाना बतलाया है।
प्राप्त तथ्यों का क्षेत्रवार विवरण से यह विदित होता है कि पखांजूर के सर्वाधिक 86.8 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सलाह को महत्व देना बतलाया है जबकि षेष 13.2 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने यह बतलाया है कि उनके सलाह को महत्व नहीं दिया जाता है। इसी प्रकार माना के सर्वाधिक 70.0 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने उनके सलाह को महत्व दिया जाना बतलाया है जबकि शेष 30.0 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सलाह को महत्व नहीं देना बतलाया है।
स्थानीय समुदाय से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता-
शरणार्थी के लिए शरणार्थी स्थल पर समाजस्य स्थापित कर पाना सबसे अधिक चुनौती भरा कार्य होता है यदि वे इस कार्य में सफल हो जाते है तो एक प्रकार से उनकी अधिकांष समस्यास्वतःसमाप्त हो जाती है। ;ज्ींचसपलंसए ेंदहममजंरू 2000द्ध6
उत्तरदाताओं से स्थानीय सामाजिक आयोजनों, पारिवारिक व धार्मिक आयोजनों में सहभागिता के विषय में तथ्यों का संकलन किया गया है। अध्ययन से प्राप्त तथ्य से यह स्पष्ट होता है कि माना शत् प्रतिषत उत्तरदाताओं ने यह बतलाया है कि स्थानीय समुदाय से जुड़ी सभी प्रमुख गतिविधियों में पूर्णतः सहभागीय होते हैं। जबकि पखांजूर में यह स्थिति थोड़ी भिन्न है जो कि निम्न तालिका में दर्षित है-
स्थानीय समुदाय से जुड़ी गतिविधियों मंे सहभागिता होने संबंधित विवरण से स्पष्ट हुआ है कि सर्वाधिक 80.8 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने पूर्णतः सहभागी होना बतलाया है जबकि 19.2 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने आंषिक सहभागिता होना बतलाया है।
प्राप्त तथ्यों का क्षेत्रवार विवरण से स्पष्ट है किपखांजुर के 75.8 प्रतिषत ने पूर्णतः एवं 24.2 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने आंषिक सहभागिता का होना बतलाया है।ज्ञात तथ्यों पर आधारित यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि, अध्ययन समूह के बहुसंख्यक शरणर्थीयों की सहभागीता स्थानीय स्तर की गतिविधियों में होती है। जबकि माना के शत् प्रतिषत उत्तरदाताओं ने पूर्णतः सहभागिता होना बतलाया है। ज्ञात तथ्यों पर अधारित यह निकाला जा सकता है की अध्ययनगत समुह के बहुसंख्यक शरणर्थियों की सहभागिता स्थानीय स्तर गतिविधियों में होती है।
गतिविधियों का स्वरुप-
स्थानीय समुदाय से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता का स्वरुप के अतर्गत धार्मिक उत्साह, त्यौहार एवं अन्य कार्यक्रमों से संबंधित प्राप्त तथ्यों के विवरण को जिसे निम्नलिखित तालिका में दर्षाया गया है-
गतिविधियों में भाग लेने के स्वरूप संबंधित विवरण सेस्पष्ट हुआ है कि धार्मिक उत्सव में 98.4 प्रतिषत उत्तरदाता सहभागी होते है। जबकि 1.6 प्रतिषत उत्तरदाता सहभागी नही होते, इसी प्रकार त्यौहार में शत् प्रतिषत उत्तरदाता सहभागी होना बतलाया एवं अन्य कार्यक्रम में सर्वाधिक 93.0 प्रतिषत उत्तरदाता सहभागी होते है। और 6.1 प्रतिषत उत्तरदाता सहभागी नही होते।
पखांजुर के शत प्रतिषत उत्तरदाताओं ने त्यौहार एवं अन्य कार्यक्रम में सहभागी होना बतलाया है जबकि 98.0 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने उत्सव आदि में सम्मिलित होना बतलाया है तथा 1.2 प्रतिषत ने उत्सव में सहभागी नहीं होना बतलाया है।
इसी प्रकार माना कैम्प में रहने वाले शरणर्थीयों की भागीदारी स्थानीय स्तर के आयोजनों में भिन्न प्रकृति की है। धार्मिक उत्सव तथा त्यौहार में षत् प्रतिषत तथा जन्म मृत्यु तथा अन्य कार्यक्रमों में केवल 10.0 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने भाग लेने की जानकारी दी है। तथ्य संकलन के दौरान यह देखा गया है कि माना कैम्प में रहने वाले शरणर्थीयों की दूरी अभी भी स्थानीय समुदाय से है यही वजह है कि बड़े धार्मिक उत्सवों/त्यौहार में चूंकि सभी लोग शामिल होते है इसलिए उनकी सहभागीता पूर्ण होती है।
स्थानीय सामाजिक संगठन होना -
प्रस्तुत अध्ययन में शरणर्थियों के स्थानीय समाजिक संगठन होने की स्थिति को ज्ञात किया गया है जिसे निम्न तालिका के माध्यम से दर्षाया गया है-
स्थानीय सामाजिक संगठन होने से संबंधित विवरण से स्पष्ट हुआ है कि 62.9 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय स्तर पर किसी भी प्रकार का सामाजिक संगठन नही होना बतलाया है। जबकि 37.1 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सामाजिक संगठन होने की जानकारी दी है।
क्षेत्रवार विवरण यह दर्षाता है कि पखांजूर के सर्वाधिक 79 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने किसी भी प्रकार के सामाजिक संगठन नहीं होना बतलाया है। जबकि 21 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय सामाजिक संगठन का होना बतलाया है।
माना के शत् प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय सामाजिक संगठन होना बतलाया है। माना केस्थानीय सामाजिक संगठन होने के मुख्य कारणों में षरणर्थियों को एक सीमित दायरे में रहना, निरंतर संवाद होना तथा पर्याप्त खाली समय होना है। जिसका वे संगठन के माध्यम से उपयोग करते है। जबकि पखांजुर के शरणर्थी काफी बडे क्षेत्र में बसे हुये है तथा स्वयं के व्यवसाय, एवं कृषि कार्य में व्यस्त है जिसके कारण उनके पास पर्याप्त मात्रा में खाली समय की कमी है जिसके परिणमतः वे समिति बनाने में उतना विष्वास नही करते।
यदि हां तो संगठन बनाने का उदृदेष्य क्या है-
स्थानीय समाजिक संगठन बनाने के उद्देष्य के अतर्गत समाजिक एवं धार्मिक उत्सवों से संबंधित प्राप्त तथ्यों के विवरण को निम्नलिखित तालिका में दर्षाया गया है-
संगठन बनाने का उद्देष्य संबंधित विवरण से स्पष्ट हुआ है कि सर्वाधिक 52.0 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सामाजिक एवं धार्मिक उत्सवों के लिए संगठन बनाना बतलाया, 32.9 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने दुर्गोत्सव गणेषोत्सव, के लिए, 8.2 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने महिला बहुद्देषीय समिति के लिए तथा सबसे कम 6.9 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने भजन मंडली के लिए, संगठन बनाने की जानकारी प्रदान किया।
क्षेत्रवार संगठन बनाने का उद्देष्य संबंधित विवरण से यह स्पष्ट हुआ है कि पखांजुर के सर्वाधिक 51.5 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने दुर्गोत्सव गणेषोत्सव समिति के लिए, 30.3 प्रतिषत ने सामाजिक एव धार्मिक उत्सवों के लिए, 9.1 प्रतिषत ने भजन मंडली एवं 9.1 प्रतिषत उत्तरदाताआंे ने महिला बहुद्देषीय समिति के लिए संगठन बनाने का मुख्य उद्देष्य होना बतलाया है।
इसी प्रकार माना के सर्वाधिक 70.0 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सामाजिक एवं धार्मिक उत्सवों के लिए, 17.5 प्रतिषत ने दुर्गोत्सव, गणेषोत्सव, समिति के लिए, 7.5 प्रतिषतने महिला बहुद्देषीय समिति एवं 5.0 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने भजन मंडली, के लिए संगठन बनाने का उद्देष्य होना बतलाया है।
संगठन के द्वारा संचालित गतिविधियाॅ -
जब सामाजिक संगठन की बाद की जाती है तो कामकाज के उन व्यवस्थाओं की बात की जाती है जो समाज के नियमों और मूल्यों के अनुसार बनी होती है। अतः किसी भी समाज के विषेष कर हिन्दू समाज के संगठनों में संचालित होने वाली गतिविधियों से संबंधित विवरण को निम्नलिखित तालिका में दर्षाया गया है-
बनाये गये संगठन की गतिविधियां संचालित होने के विवरण से स्पष्ट हुआ है कि सर्वाधिक 52.1 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियां, के लिए संगठन बनाना, 19.2 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने दुर्गा उत्सव के लिए, 13.7 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने अन्य धार्मिक कार्यों हेतु, 8.2 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने दोना पत्तल एवं अन्य सामग्री बनाना तथा 6.8 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने भजन कीर्तन के लिए संगठन में गतिविधियां संचालित किया जाना बतलाया है।
क्षेत्रवार विवरण से स्पष्ट हुआ है कि पखांजुर के सर्वाधिक 30.3 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियां, 21.2 प्रतिषत ने दुर्गा उत्सव, 21.2 प्रतिषत ने अन्य धार्मिक कार्यों हेतु, 18.2 प्रतिषत् ने दोना पत्तल एवं अन्य सामग्री बनाना एवं शेष 9.1 प्रतिषत ने भजन कीर्तन के लिए बनाये गये संगठन में गतिविधियां संचालित किया जाना बतलाया है।
इसी प्रकार माना के सर्वाधिक 70 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सामाजिक एवं धार्मिक गतिविधियां, 17.5 प्रतिषत ने दुर्गा उत्सव, 7.प्रतिषतने अन्य धार्मिक कार्यों हेतु एवं शेष 5.0 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने भजन कीर्तन के लिए संगठन में गतिविधियां संचालित किया जाना बतलाया है।
स्थानीय समुदाय से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता का होना-
स्थानीय समुदाय से जुड़ी गतिविधियों में जैसे समाजिक आयोजन, स्थानीय उत्सव, धार्मिक पर्व व स्थानीय स्तर की समस्याओं पर एवं गैर समुह के अन्य आयोजनों में सहभागी होने से संबंधित प्राप्त तथ्यों को निम्नलिखित तलिका में दर्षाया गया है-
स्थानीय समुदाय से जुड़ी गतिविधियों में सहभागिता होने संबंधित विवरण से स्पष्ट हुआ है कि सर्वाधिक 77.1 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सामाजिक आयोजनों में सहभागिता होना बतलाया है। जबकि 22.9 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सामाजिक आयोजनों में सहभागिता नही होना बतलाया है। 68.6 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय धार्मिक आयोजनों में सहभागिता होना बतलाया है। जबकि 31.4 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय धार्मिक आयोजनों में सहभागिता नही होना बतलाया है। 58.9 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय उत्सव में सहभागिता होना बतलाया है। जबकि 41.1 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय उत्सव में सहभागिता नही होना बतलाया है। 57.4 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने गैर समूह के विभिन्न सामाजिक, परिवारक उत्सवों एवं आयोजनों में, सहभागिता होना बतलाया है। जबकि 42.6 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने गैर समूह के विभिन्न सामाजिक, परिवारक उत्सवों एवं आयोजनों में, सहभागिता नही होना बतलाया है। 53.8 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय समस्याओं के लिए होने वाली बैठकों में सहभागिता होन बतलाया है। जबकि 46.2 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय समस्याओं के लिए होने वाली बैठकों में सहभागिता नही होना बतलाया है।
क्षेत्रवार विवरण से यह स्पष्ट हुआ है कि पखांजुर के सर्वाधिक 72.0 प्रतिषत ने स्थानीय धार्मिक आयोजनों में पूर्णतः एवं 28.0 प्रतिषत ने आंषिक सहभागिता होना बतलाया है, 71.3 प्रतिषत ने सामाजिक आयोजनों में पूर्णतः एवं 28.7 प्रतिषत ने आंषिक , 59.9 प्रतिषत ने स्थानीय उत्सवों में पूर्णतः एवं 40.1 प्रतिषत ने आंषिक सहभागिता, 58.0 प्रतिषत ने गैर समूह के विभिन्न सामाजिक, परिवारक उत्सवों एवं आयोजनों में, पूर्णतः एवं 42.0 प्रतिषत आंषिक कहा 59.9 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय समस्याओं के लिए होने वाली बैठकों में सहभागिता होना बतलाया है एवं 40.1 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने आंषिक सहभागिता होना बतलाया है।
इसी प्रकार माना के शत् प्रतिषत उत्तरदाताओं ने सामाजिक आयोजनों में सहभागिता होना बतलाया है। 55.0 प्रतिषत ने स्थानीय उत्सवों में, 55.0 प्रतिषत ने स्थानीय धार्मिक आयोजनों में, 55.0 प्रतिषत ने गैर समूह के विभिन्न सामाजिक, पारिवारिक उत्सवों, आयोजनों में तथा शेष 55.0 प्रतिषत ने स्थानीय समस्याओं के लिए होने वाली बैठकों में सहभागिता होना बतलाया है। जबकि शेष 45.0 प्रतिषत उत्तरदाताओं ने स्थानीय उत्सवों में, स्थानीय धार्मिक आयोजनों में, गैर समूह के विभिन्न सामाजिक, पारिवारिक उत्सवों, आयोजनों मेंएवं स्थानीय समस्याओं के लिए होने वाली बैठकों में आंषिक सहभागिता होना बतलाया है।
समूह/समुदाय के कार्यक्रमों में गैर समुह/समुदाय के लोगो की सहभागिता का होना
समूह/समुदाय के कार्यक्रमों में गैर समुह/समुदाय के लोगो की पारिवारिक, धार्मिक, व समुदायिक उत्सवों एवं विभिन्न आयोजनों में एक दूसरे के सहभागी होने से संबंधित विवरण को निम्नलिखित तालिका में दर्षाया गया है-
समूह/समुदाय के कार्यक्रमों में गैर समुह/समुदाय के लोगो की सहभागिता के संदर्भ में प्राप्त विवरण सेस्पष्ट हुआ है कि सामुदायिक कार्यक्रमों में सहभागिता संबंधित सर्वाधिक 84.2 प्रतिषत उत्तरदाताआंे ने सहभागिता होना बतलाया है। जबकि 15.8 प्रतिषत उत्तरदाताआंे ने सहभागिता नही होना बतलाया है। 79.1 प्रतिषत उत्तरदाताआंे ने पारिवारिक आयोजनों में सहभागिता होना बतलाया है। जबकि 20.9 प्रतिषत उत्तरदाताआंे ने पारिवारिक आयोजनों में सहभागिता नही होना बतलाया है। 65.00 प्रतिषत उत्तरदाताआंे ने धार्मिक उत्सव में सहभागिता होना बतलाया है। जबकि 35.00 प्रतिषत उत्तरदाताआंे ने धार्मिक उत्सव में सहभागिता नही होना बतलाया है।
क्षेत्रवार विवरण से यह स्पष्ट हुआ है कि पखांजुर के सर्वाधिक उत्तरदाताआंे ने सामुदायिक कार्यक्रमों में 98.00 प्रतिषत ने पूर्णतः एवं 2.0 प्रतिषत ने आंषिक, 96 प्रतिषत ने पारिवारिक आयोजनों में पूर्णतः एवं 4.0 प्रतिषत ने आंषिक तथा 77.00 प्रतिषत उत्तरदाताआंे ने धार्मिक उत्सव, आयोजनों में पूर्णतः एवं 23.00 प्रतिषत ने आंषिक सहभागिता होना बतलाया है।
इसी प्रकार माना के सर्वाधिक 87.5 प्रतिषत ने पारिवारिक आयोजनों में आंषिक एवं 12.5 प्रतिषतने पूर्णतः, 82.5 प्रतिषतने धार्मिक उत्सवों में आंषिक एवं 17.5 प्रतिषत ने पूर्णतः, एवं षेष 70.0 प्रतिषत ने सामुदायिक कार्यक्रमांे में आंषिक एवं 30.0 प्रतिषत ने पूर्णतः सहभागिता होना बतलाया है।
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Received on 02.03.2017 Modified on 07.06.2017
Accepted on 20.07.2017 © A&V Publication all right reserved
Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2017; 5(3): 161-170 .